केसरगंज ज़िले के गांवों में डाकघर की बचत योजनाओं में महिलाओं के खाते एक साल में लगभग दोगुने हो गए हैं। ज़िले के डाक विभाग के मुताबिक़ 60 गांवों में महिलाओं के नाम पर 9,800 से ज़्यादा नए खाते खुले।
इस बदलाव के पीछे महिला स्वयं सहायता समूहों का एक सीधा-सादा अभियान है। समूह की सदस्य हर महीने की बैठक में बताती हैं कि छोटी रक़म भी नियमित जमा करने से कैसे बढ़ती है, और जिनके पास खाता नहीं है उनकी सूची बनाती हैं।
अमरपुर गांव के समूह की अध्यक्ष सुनीता देवी ने बताया, "पहले हम पैसा घर में डिब्बे में रखते थे। कभी मेहमान आए, कभी त्योहार, और पैसा ख़त्म। अब हर महीने 200 रुपये डाकघर में जाते हैं और कोई उसे छू नहीं सकता।"
गुरुवार का कैंप
डाक विभाग ने इस मांग को देखते हुए हर गुरुवार को गांवों में कैंप लगाना शुरू किया। डाकिया और एक सहायक बायोमेट्रिक मशीन लेकर पंचायत भवन पहुंचते हैं, जहां खाता खोलने, पैसा जमा करने और पासबुक अपडेट करने का काम होता है।
- खाता खोलने के लिए पहचान पत्र और पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो की ज़रूरत होती है।
- छोटी बचत की योजनाओं में न्यूनतम जमा राशि कम रखी गई है।
- बच्चियों के नाम पर खाते खोलने में भी रुचि बढ़ी है।
डाक अधीक्षक ने कहा कि अगले चरण में महिलाओं को बीमा और पेंशन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। समूहों का लक्ष्य है कि अगले साल तक हर परिवार में कम से कम एक महिला के नाम पर बचत खाता हो।














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