डीपफ़ेक यानी एआई की मदद से बनाए गए ऐसे वीडियो, फ़ोटो या आवाज़, जो किसी असली व्यक्ति जैसे दिखते या सुनाई देते हैं। तकनीक इतनी सुधर गई है कि सिर्फ़ आंखों से पहचानना हमेशा संभव नहीं। फिर भी कुछ संकेत मदद करते हैं।
वीडियो में किन बातों पर ध्यान दें
- होंठों की हरकत और आवाज़ का मेल न होना।
- पलकें बहुत कम झपकना या चेहरे के किनारों पर धुंधलापन।
- रोशनी और परछाईं का अजीब होना, ख़ासकर चेहरे और पृष्ठभूमि में।
- चश्मे, कान की बाली या बालों के आसपास अचानक बदलाव।
आवाज़ वाली ठगी
सबसे आम ठगी में किसी रिश्तेदार की नक़ली आवाज़ में फ़ोन आता है: "मैं मुसीबत में हूं, तुरंत पैसे भेजो।" ऐसे में घबराने के बजाय फ़ोन काटें और उस व्यक्ति को उसके पुराने नंबर पर ख़ुद फ़ोन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कोई ऐप डीपफ़ेक पकड़ सकता है?
कुछ टूल मदद करते हैं, लेकिन कोई भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं। सबसे अच्छा तरीक़ा स्रोत की जांच है।
परिवार में क्या सावधानी रखें?
परिवार के लिए एक "कोड शब्द" तय करें, जिसे मुसीबत की कॉल में पूछा जा सके।
किसी डीपफ़ेक का शिकार हों तो क्या करें?
वीडियो या कॉल के सबूत सुरक्षित रखें, प्लेटफ़ॉर्म पर रिपोर्ट करें और साइबर क्राइम हेल्पलाइन या पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
डीपफ़ेक का सबसे बड़ा हथियार हमारी जल्दबाज़ी है। किसी चौंकाने वाले वीडियो को आगे भेजने से पहले एक मिनट रुककर सोचना ही सबसे अच्छा बचाव है। ऑनलाइन ठगी के दूसरे संकेतों के लिए पढ़ें त्योहारी सीज़न की ठगी पर हमारी गाइड।








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