
चांदनी के पार रिव्यू: नदी किनारे के कस्बे की शांत कहानी, जो आख़िर में रुला देती है
निर्देशक मेघना भोसले की दूसरी फ़िल्म एक मल्लाह और उससे दूर हो चुकी बेटी के एक मानसून की कहानी है। दमदार अभिनय और धैर्य से कही गई कहानी, बीच का धीमा हिस्सा थोड़ा खलता है।

